Friday, November 15, 2013



एक स्थानीय कंज्‍यूमर फोरम ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को एक शख्स को 10,000 रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है. उस व्‍यक्ति का अंगूठा यात्रियों के सामान की जांच के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक्स-रे मशीन में फंसकर जख्मी हो गया था. गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन में सवार होने से पहले यात्रियों को अपना सामान एक्स-रे मशीन से गुजारना होता है. पूर्व जिला उपभोक्ता विवाद निपटान फोरम ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के स्टेशन मास्टर की नोटिंग पर भरोसा करते हुए पाया कि शिकायतकर्ता को उचित सेवा मुहैया कराने में डीएमआरसी ने लापरवाही की. जिस घटना के सिलसिले में डीएमआरसी को हर्जाने के भुगतान का फरमान जारी किया गया है, वह दो साल पहले राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर हुई थी. स्टेशन मास्टर ने अपनी नोटिंग में साफ तौर पर लिखा था कि उसने एक्स-रे मशीन की जांच की थी और पाया था कि पहले रॉलर और कन्वेयर बेल्ट के बीच की जगह बहुत कम थी और यदि कोई इस खाली जगह में अपना अंगूठा रखता तो उसका अंगूठा इसमें खिंचा चला आता. नोटिंग में यह भी कहा गया कि सुरक्षा नियंत्रण कक्ष को तुरंत कहा गया था कि वह मैकेनिक बुलाकर उस खाली जगह को थोड़ा बड़ा करे ताकि ऐसी घटना रोकी जा सके. एन.ए. जैदी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘विस्तृत चर्चा और उपरोक्‍त कथन पर विचार करते हुए हमने पाया कि शिकायतकर्ता को उचित सेवा मुहैया कराने में डीएमआरसी का रवैया लापरवाही भरा था. हम आदेश देते हैं कि डीएमआरसी शिकायतकर्ता को 10,000 रुपये का भुगतान करे, क्योंकि उन्हें मानसिक परेशानी उठानी पड़ी.’ पूर्वी दिल्ली के रहने वाले एस.एल. भारद्वाज की शिकायत पर फोरम ने यह आदेश दिया. डीएमआरसी ने अपने बचाव में दलील दी थी कि शिकायतकर्ता का अंगूठा इस वजह से चोटिल हुआ क्योंकि उन्होंने रॉलर पर बाहर की ओर अपने बैग के आने का इंतजार करने की बजाय अपना हाथ मशीन में डाल दिया. बचाव में डीएमआरसी की ओर से यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता को घटना के तुरंत बाद फर्स्‍ट एड भी मुहैया कराया गया था और उनसे यह भी कहा गया था कि उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस की सेवा भी दी जा सकती है पर उन्होंने यह सेवा लेने से इंकार कर दिया.
Reactions:

0 comments :